Gaya Bihar देखिए कैसे किसान के बेटे ने किसान के दर्द देखकर लिख डाली नरेंद्र मोदी को पत्र

क्या आप किसान के दर्द समझ सकते है सायद नहीं क्युकी आपको सही से पता भी नहीं होगा कि धान,गेहू,मक्का,सरसो, की उपज कैसे होती है लेकिन आप किसान हो या किसान के बेटे हो तो आपको अच्छी तरह अंदाजा होगा किसान के मेहनत का,
तो आज इस पोस्ट में एक किसान की बेटा का दर्द है जरूर शेयर करे अगर आप किसान को समझते है  तो:-
एक किसान के बेटा जो कि गया बिहार के निवासी है उसने अपने साइकिल से पढ़ाई के लिए बाहर निकला तो देखा कि एक कूड़ा पर चावल और दाल फेका हुआ है ,तो उसने वही पर अपना साइकिल रोक कर देखने लगा और देखते ही उस लड़का का आंख आंसू आ गया,और मन ही मन सोचने लगा कि ,मेरे पिताजी इस अनाज के लिए कितना मेहनत करते है और ये कूड़ा पर फेका हुआ है, उसके बाद उस लड़का ने क्लास न जाकर घर लौट आया और उसने एक पत्र लिखा  पीएम नरेंद्र मोदी के पास,

क्या लिखा हुआ था उस पत्र में जरुर पढ़े:

उस पत्र में लिखा हुआ था कि आदरणीय हमारे देश के प्रधानमंत्री जी क्या आपको पता है कि धान की उपज कैसे होती है,क्या आपको पता है कि खेती में कितना मेहनत लगती है ,मुझे अच्छी तरह मालूम है कि आपको नहीं पता होगा, लेकिन आज मै आपको बताएंगे कि किस तरह हमलोग मेहनत करते है तब जाकर आप जैसे नेता और बड़े बड़े अंबानी,अदानी का पेट भरता है


किस तरह होता है धान की उपज:-


धान के फसल के लिए सबसे पहले  हल से खेत की जुताई करते है तब जाकर उसमे धान की बीज को खेत में डालते है हाथ से, 
उसके बाद 1 महीना इंतेज़ार करते है उसके बाद बीज को देखते है की तैयार हुआ है कि नहीं धान को खेत में रोपने के लिए|
 जी हा उस बीज को उस खेत से  दूसरे खेत में फिर से एक एक करके पेड़ के तरह रोपते है ,
उसके पहले, खेत को बैल के द्वारा खेत की जुताई करते है उसके बाद खुद हाथ में कुदाल लेकर मिट्टी को काटकर  आरी पर रखना पड़ता है, उसमे कमर से लेकर पूरा शरीर में दर्द जकड़ जाती है| फिर भी करते है क्युकी किसान  अनाज को अन्न देवता समझते है,और मेहनत करने से कभी भी नहीं कतराते है,लेकिन बुरा तब लगा मोदीजी, जब मै अन्न देवता को रोड के किनारे कूड़े के ऊपर चावल दाल फेका हुआ देखता हू  तो ,इसलिए मै  पत्र आपके पास लिख रहा हु, ताकि आप हम किसानों के बारे में  कुछ सोचे क्युकी इतना मेहनत करने के बाद भी किसान के एक दिन की कमाई 100-150 है, क्यू न आप दाम में बढ़त करते है, ताकि कोई भी अन्न को फेकने से पहले 20 बार सोचे कोई क्यू नही समझ रहा है अन्न का मतलब ,

अभी भी आपको सही से नहीं पता होगा की खेत में धान के रोपाई के बाद क्या होता है  तो मै बताता हु:

धान के रोपाई के बाद उसमें खाद डालना,
और जब धान तैयार होने लगता है, तो उसमे घास निकलती है उसको खुद हमारी माताएं,बहने अपने हाथो से घास को निकलते है ताकि धान कि लंबाई बढ़े ,और घास 1 बार नहीं बल्कि 2-3 बार निकालते है 15-20 दिन के भीतर,उसके बाद जाकर धान तैयार होती है,
तैयार होने के मतलब ये मत समझना कि अब इसको खाने के उपयोग में ला सकते है जी नहीं, अब धान को खुद अपने हाथ से काटना पड़ता है ,और काटकर उसको एक जगह पर लाकर रखना पड़ता है ,
उसके बाद धान को पिटाई करते है ,मतलब जिस तरह पेड़ से अंगूर को तोड़ते है,या फिर किसी पेड़ से तभी फल टूटेगा जब उसको तोड़ेंगे ठीक उसी प्रकार धान को तोड़ते है पौधा से,
उसके बाद जाकर घर पर रखते है ,फिर उस धान को उसना  करते है मतलब कि (boil) करते है जिस तरह आलू, अंडा (boil) होता है,ठीक उसी प्रकार, उसके बाद जाकर (बॉयल) धान को मशीन मे  डालते है तब जाकर चावल निकलता है ,और जब चावल मशीन से निकल भी जाए उसके बाद  भी घर पे पंखा द्वारा साफ़ करते है ताकि जो भुशा रहता है वो अलग हो जाए तब जाकर हम बाज़ार में देते है|फिर भी इतना कम दाम क्यू मिलता है , मै जानना चाहता हु मोदीजी आप किसान के बारे में क्या सोचते है,आपकी प्रतिक्रिया का इंतेज़ार रहेगा,धन्यवाद

और क्या लिखा उस पत्र में ये भी जाने:

मुझे नहीं पता आप ये पत्र को  पढेगे या नहीं ,और पढेगे तो आप ये जरूर सोचेंगे या अपनी प्रतिया में लिखेगे की ये सब काम मशीन से भी हो सकती है ,जी हां मै मानता हु मोदीजी ये सब काम मशीन से भी हो सकती है ,लेकिन मै एक छोटा किसान हू ,और मेरे पास ही नहीं बल्कि 75% किसान भाइयों के पास य सब मशीन नहीं होगी,और जब भाड़े की मशीन मंगवाता भी हूं तो बहुत ज्यादा पैसे लग जाते है और सब के पास इतना नहीं होती और कुछ भी बचत नहीं होगी,तो घर परिवार कैसे चलेंगे,इसलिए आपसे विनती है कि कोई अच्छा प्रतिक्रिया दे और किसान भाइयों के लिए कुछ करे ताकि किसान के बेटे,बेटी भी अच्छा इंस्टीट्यूट,कॉलेज में पढ़े


तो सुना किस तरह किसान के बेटे ने लिख डाली नरेंद्र मोदी को पत्र:

अगर आपको इस पोस्ट से किसान का दर्द का समझ म आ गया है तो आप इस पोस्ट को अपने सभी साथी के पास भेज सकते है जय जवान जय किसान
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